दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.

Friday, October 31, 2008

ईश्वर ने अल्लाह से कहा

गुवाहाटी बम धमाकों के बाद, ईश्वर और अल्लाह की मीटिंग हुई. ईश्वर ने कहा, यार जब हमारे अनुयाई इंसानों का खून बहाते हैं तो मुझे बहुत तकलीफ होती है. इस से भी ज्यादा दुःख की बात यह है कि यह लोग यह खून खराबा हमारा नाम लेकर करते हैं. 

अल्लाह ने कहा, क्या करें भाई सब कुछ गड़बड़ा गया है. अब हम से तो कोई डरता ही नहीं. बस जो शैतानों ने कह दिया इन के लिए वही सही है. काम शैतान का और करते हैं हमारे नाम पर.

ईश्वर ने कहा, क्या करें, एक ब्लाग बनायें क्या? 

अल्लाह बोले, उस से क्या फायदा होगा, यह लोग उस पर भी गाली-गलौज शुरू कर देंगे और मुफ्त में बदनाम होंगे हम. सब लोग यही कहेंगे, ईश्वर-अल्लाह के ब्लाग पर देखो क्या जम कर गाली-गलौज हो रही है. 

ईश्वर ने कहा, मुझे तो डर लग रहा है, क्या होगा आगे?

अल्लाह ने निराशा से कहा, वही होगा जो शैतान चाहेगा. 

Thursday, October 30, 2008

बुरा इंसान

न हिंदू बुरा है,
न मुसलमान बुरा है,
करता है जो नफरत,
वह इंसान बुरा है.

ईश्वर ने बनाया है प्रेम, 
शैतान ने बनाई है नफरत.
प्रेम ईश्वर की पूजा है.
नफरत शैतान  का नाम दूजा है. 

प्रेम करो सबसे, नफरत न करो किसी से.

Wednesday, October 29, 2008

सब को मिले उजालों का संसार

    हे शारदे  माँ, हे शारदे माँ
    अज्ञानता  से हमें  तार दे माँ 

    तू स्वर की देवी  ये संगीत  तुझसे,
    हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे

    हम है अकेले, हम है अधूरे ,
    तेरी शरण  हम हमें प्यार दे माँ

    मुनियों  ने समझी, गुनियों  ने जानी,
    वेदों की भाषा, पुराणों की बानी

    हम भी तो समझे, हम भी तो जाने,
    विद्या  का हमको अधिकार दे माँ

    तू श्वेत वर्णी  कमल पे विराजे,
    हाथों में  वीणा, मुकुट  सर पे  साजे 

    मनसे  हमारे मिटाके  अंधेरे,
    हमको उजालों  का संसार  दे माँ

    हे शारदे माँ, हे शारदे माँ. 




Tuesday, October 28, 2008

ऐसा क्यों होता है?

हम मन्दिर मैं दान करते हैं,
हम गुरुओं को दक्षिणा देते हैं,
नेताओं की जेब भरते हैं,
जरूरी गैरजरूरी रिश्वत देते हैं,
सामाजिक रुतबे के लिए पैसे उड़ाते हैं,
पर एक गरीब की मदद नहीं करते.

Monday, October 27, 2008

प्रेम करो सबसे, नफरत न करो किसी से

एक ब्लाग है 'मेरी डायरी'. सूत्रधार हैं फिरदौस. वह अपना परिचय यह कह कर देती हैं - 'मेरे अल्फाज़ मेरे जज़्बात और मेरे ख्यालात की तर्जुमानी करते हैं...और मेरे लफ्ज़ ही मेरी पहचान हैं...'

उनके ब्लाग की कुछ पोस्ट्स के शीर्षक देखिये:

रावण के साथ बजरंग दल का स्वाहा?

महाराष्ट्र : फ़सादियों को हुकूमत की खुली छूट

बेगुनाहों की गिरफ्तारियां और 'एनकाउन्टर' गहरी साज़िश का नतीजा

आईबी के अफ़सरान ने दी हिन्दू दहशतगर्दों को ट्रेनिंग

हिन्दू आतंकवाद : एक और साध्वी गिरफ्तार

हिन्दू आतंकवाद : भगवा चोले में छुपे आदमखोर

मालेगांव-मोडासा धमाकों में हिन्दू दहशतगर्दों का हाथ

समझ सको तो समझ कर देखो, इस्लाम सरापा रहमत है

निहत्थे मुसलमानों पर देसी केमिकल हथियारों से हमला किया गया

मुसलामानों का वक़ार और इस्लाम की अज़मत दाव पर

मुस्लिम क़ौम को अनपढ़ रखने की साज़िश

हम पुलिस हिरासत में बहुत ख़ुश हैं और हमने ही बम रखे थे

मुस्लिमों को बदनाम करने की साजिश हैं धमाके

इंडियन मुजाहिदीन का असली मास्टर माइंड कौन...?

मुसलमानों पर पुलिस का क़हर

''बुराई को भलाई से दूर करो'' : क़ुरान

इस तरह फिरदौस बुराई को जीत रही हैं भलाई से. किसी उर्दू पत्रिका की बात भी करती हैं फिरदौस. ऐसी लेखनी से क्या हासिल होगा? क्या इस से नफरत कम होगी, क्या प्यार और विश्वास बढ़ेगा समाज के अलग वर्गों में? फिरदौस एक शिक्षित और समझदार महिला हैं पर न जाने वह ऐसी भाषा क्यों प्रयोग कर रही हैं? कोई भी अपनी बात अगर सही तरह से कहे तो उसका असर सही होता है. ऐसी भाषा से मसले सुलझते नहीं, और उलझते हैं. मैंने कई बार उन से निवेदन किया है पर हर बार उन की भाषा और तीव्र हो जाती है.

ऐसा क्यों होता है?

हम मानते कुछ हैं
कहते कुछ हैं
करते कुछ हैं. 

प्रेम भगवान् का एक रूप है,
प्रेम ही मानो,
प्रेम ही कहो,
प्रेम ही करो. 

प्रेम करो सबसे, 
नफरत न करो किसी से. 

Sunday, October 26, 2008

इस दीवाली पर ...........

पटाखे चलाइये,
अपने अन्दर सोये इंसान को जगाने के लिए,
दिए जलाइये,
अपने अन्दर गहराते अन्धकार को मिटाने के लिए.

प्रेम करो सबसे, नफरत न करो किसी से. 

आप सबको दीवाली की शुभकामनाएं. 

Friday, October 24, 2008

अल्लाह, कृपया पधारें हमारे यहाँ इस दीपावली पर

चलो दीपावली पर,
इनवाईट करें अल्लाह को,
और देखें, 
हमारे ईश्वर से उनकी कैसी पटती है!

Tuesday, October 21, 2008

क्या कभी ऐसा होगा?

वह ईद मनाते हैं,
हम होली,
हम ईद मनाएंगे,
वह होली. 

Monday, October 20, 2008

जन्नत

जो नहीं जानते,
उस के लिए खो रहे हैं,
जो मिला हैं.
एक कहावत है,
हाथ की एक चिड़िया बेहतर है,
दो चिड़ियों से जो पेड़ पर बैठी हैं. 

Saturday, October 18, 2008

दुल्हन

स्वयम्वर में बने बैठे हैं,
मुसलमान एक दुल्हन,
रिझा रहे हैं उसे हर तरह से,
स्वघोषित धर्म-निरपेक्षी,
शायद डाल दे मेरे गले में,
वोटों का हार यह दुल्हन!

Friday, October 17, 2008

अल्पसंख्यकवाद या आतंकवाद की पैरवी

अल्पसंख्यकवाद कहूं या कहूं आतंकवाद की पैरवी. अब तो दोनों एक दूसरे में ऐसे घुल-मिल गए हैं जैसे दूध में शक्कर घुल-मिल जाती है. एक के बाद एक आतंकवाद के पैरोकार खड़े हो रहे हैं और सरकार पर दबाब डाल रहे हैं कि देश में हुए बम धमाकों की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाय. पहले मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने आवाज उठाई - हमें पुलिस और पुलिस की जांच पर शक है इस लिए इन की जांच की जांच कराओ. फ़िर सरकार की वैशाखी पार्टियों ने यही आवाज उठाई. फ़िर जामिया नगर की यात्रा की उन्होंने जो कहते हैं कि हमने सरकार को गिरने से बचाया, और यही आवाज उठा दी. आने वाले चुनाव  से घबराई सरकार के कुछ मंत्री  भी जामिया नगर पहुँच गए और इस आवाज में आवाज मिलाने लगे. सरकार ने कुछ पुख्ता सबूत उन्हें दिखाए और वह संतुष्ट नजर आए. पर इस से घबरा गए अल्पसंख्यकवादी. कांग्रेस की अल्पसंख्यकवादी शाखा ने अब आवाज बुलंद की. उन्होंने कहा कि वह सोनिया से मिलेंगे, फ़िर उस के बाद मनमोहन से मिलेंगे, और उन्हें बताएँगे कि अल्पसंख्यकवाद की जन्मदाता कांग्रेस अब अपने धर्म को नहीं छोड़ सकती. अल्प्संख्यखों के वोट बिना यह मांग माने नहीं मिलने वाले. अब सरकार भी इस आवाज में आवाज मिलाने की तैयारी कर रही है. 

जल्दी ही हो सकता है कि पुलिस के आतंकवाद की जांच होने लगे और आतंकवादियों के आतंकवाद की जांच फाइलों में बंद हो जाए. वाह रे अल्पसंख्यकवाद और अल्पसंख्यकवाद के साए में पनपता आतंकवाद!

Tuesday, October 14, 2008

हिन्दुओं को कर्णाटक में गुस्सा क्यों आया

अगर आप जानना चाहते हें कि हिन्दुओं को कर्णाटक में गुस्सा क्यों आया तो इस लिंक पर जाइए -

हिन्दुओं को गुस्सा क्यों आया?

WHAT MADE HINDUS ANGRY IN KARNATAKA

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By François Gautier

06 Oct 2008 02:12:00 AM IST

WHAT MADE HINDUS ANGRY IN KARNATAKA

I WAS born in a Catholic family. My uncle was a priest, a wonderful
man of warmth and compassion and I spent most my early years in
Catholic boarding schools. When I was young I wanted to become a
missionary and to 'convert' pagans in Asia. What I was taught by
priests was that Hindus worship false gods and they needed to be
brought back to the True Word by Jesus Christ.

Then of course, I came to India and discovered that actually Hindus,
far from being the heathens, as had been portrayed in Europe, not only
believed God's diversity, the wonderful concept of avatar, but had
given refuge to all persecuted minorities of the world, whether the
Syrian Christians, the Parsis, the Jews (India is the only country in
the world where Jews were not persecuted), the Armenians, or today the
Tibetans.

I am also aghast at the one-sided coverage by the Indian media of the
Christian- Hindu problem: blasts after blasts have killed hundreds of
innocent Hindus in Varanasi, Delhi, Mumbai train blasts, Jaipur, etc.
Yet, neither Manmohan Singh nor Sonia Gandhi have pronounced once the
word 'Islamic terrorism.' But when furious Hindus, tired of being made
fun of, of witnessing their brothers and sisters converted by
financials traps, of seeing a 84-year-old swami and his Mataji
brutally murdered, of reading blasphemy about their Gods, vent their
anger against churches, many of them makeshifts, the Indian government
goes after the soft target which the Hindus are. The same thing
applies to the United States: they never warned Muslim organisations
in India about the killing of Hindus, but when dollars are used to buy
new converts and it angers the majority community of India,Washington
has the arrogance to issue a warning, and Manmohan Singh does not have
the pride to tell the US to mind its own business.

Neither the Indian press nor the western correspondents bothered to
write about what made Hindus angry in Karnataka: Newlife, one
important western funded missionary centre (
http://www.newlifevoice.org), began making conversions in and around
Mangalore by accosting poor people in market areas, or in bus stands,
befriending them and then taking them to churches to introduce them to
the father.

Upon introduction they were paid Rs 2,500 per person and then taken to
the Velankanni shrine, in Tamil Nadu, where they would get another Rs.
3,000.

When they finally converted to Christianity by changing the name, they
got an incentive of Rs 10,000 onwards.

Newlife would then give them instructions to abandon wearing tilak on
forehead, not to visit and offer prayers at the Hindu temples,
replacing the photos and idols of Hindu gods and goddesses with a
Cross, etc.

But what really angered local Hindus was when Newlife went one step
further and published a book in Kannada — Satya Darshini — which was
widely distributed by its missionaries. Here below is the translation
of some of the most abusive passages:

"Urvashi — the daughter of Lord Vishnu — is a prostitute.

Vashistha is the son of this prostitute.

He in turn married his own Mother. Such a degraded person is the Guru
of the Hindu God Rama. (page 48).

When Krishna himself is wallowing in darkness of hell, how can he
enlighten others? Since Krishna himself is a shady character, there is
a need for us to liberate his misled followers (page 50). It was
Brahma himself who kidnapped Sita.

"Since Brahma, Vishnu and Shiva were themselves victims of lust, it is
a sin to consider them as Gods. (page 39).

When the Trinity of Hinduism (Brahma, Vishnu and Shiva) are consumed
by lust and anger, how can they liberate others? The projection of
them as Gods is nothing but a joke. (page 39). God, please liberate
the sinful people of India who are worshipping False Gods. (Page 39)."

When blasphemy and much worse is brought against the most sacred Hindu
Gods, Hindus are supposed to take it meekly as sheep and let
themselves be converted to a foreign religion!

There are more than 4,000 foreign Christian missionaries involved in
conversion activities across different states.

In Tripura, there were no Christians at the time of independence.
There are 1,20,000 today, a 90 per cent increase since 1991.

The figures are even more striking in Arunachal Pradesh, where there
were only 1,710 Christians in 1961, but 1.2 million today, as well as
780 churches!

In Andhra Pradesh, churches are coming up every day in far-flung
villages and there was even an attempt to set up one near Tirupati.

Christians throughout the ages have strived on the concept of
persecution and as a brought up Catholic, I remember feeling bad about
all those martyred saints of Christianity. Christians in India like to
say that they are only two per cent and can do no harm. But it is a
sham: in the Tamil Nadu coastal belt from Chennai to Kanyakumari,
there must be now 10 per cent Christians post-tsunami and the same may
be true in other parts of south India.

My heart goes out to Karnataka Chief Minister BS Yeddyurappa who took
a courageous stand against unethical Christian conversions, but is now
under pressure from the Centre.

The BJP, having learnt from bitter experience that the Congress has no
qualm in invoking President's rule under fallacious pretexts in states
which are ruled by non-Congress governments is in a quandary: it must
show some action against militant Hindu groups while remaining true to
itself.

This is why Yeddyurappa took some action against Hindu groups while
saying that his government will not tolerate forcible conversions and
will take stringent action against missionaries involved in
conversions.

And ultimately, the blame must fall on Hindus: they are 800 million in
India, the overwhelming majority; they have the brains, they have the
money and they have the power. But either their intellectual and
political class sides with the minorities, out of fear, inferiority
complex imbedded by the British or just sheer crass political
opportunism, or the bigger mass is indifferent inert, selfish,
un-civic conscious. Every Hindu is the inheritor of the only surviving
spiritual knowledge which at the moment is under a concerted attack by
Christian missionaries, Americanisation, Marxism and Islamic
fundamentalism.

fgautier@rediffmail.com

ईसाई मिशनरियों द्बारा हिंदू धर्म को गाली-गलौज

एक ब्लाग (मोहल्ला) पर छपी एक टिपण्णी के अनुसार “न्यू लाईफ़ वॉइस” मिशनरी केन्द्र ने एक पुस्तक प्रकाशित की जिसका नाम रखा गया “सत्य दर्शिनी”, और इस बुकलेटनुमा पुस्तक को बड़े पैमाने पर गाँव-गाँव में वितरित किया गया। इस में छापा था:
"1) “…इन्द्रसभा की नृत्यांगना उर्वशी विष्णु की पुत्री थी, जो कि एक वेश्या थी…”।
2) “…गुरु वशिष्ठ एक वेश्या के पुत्र थे…”।
3) “…बाद में वशिष्ठ ने अपनी माँ से शादी की, इस प्रकार के नीच चरित्र का व्यक्ति भगवान राम का गुरु माना जाता है…” (पेज 48)।
4) “…जबकि कृष्ण खुद ही नर्क के अंधेरे में भटक रहा था, तब भला वह कैसे वह दूसरों को रोशनी दिखा सकता है। कृष्ण का चरित्र भी बहुत संदेहास्पद रहा था। हमें (यानी न्यूलाईफ़ संगठन को) इस झूठ का पर्दाफ़ाश करके लोगों को सच्चाई बताना ही होगी, जैसे कि खुद ब्रह्मा ने ही सीता का अपहरण किया था…” (पेज 50)।
5) “…ब्रह्मा, विष्णु और महेश खुद ही ईर्ष्या के मारे हुए थे, ऐसे में उन्हें भगवान मानना पाप के बराबर है। जब ये त्रिमूर्ति खुद ही गुस्सैल थी तब वह कैसे भक्तों का उद्धार कर सकती है, इन तीनों को भगवान कहना एक मजाक है…” (पेज 39)।

इस पुस्तक को पढ़ने के बाद लोग भड़क गये और यही इन दंगों का मुख्य कारण रहा. यह सही है कि इस तरह की किताब बांटी गई, तो सवाल यह उठता है कि क्या यह भड़काऊ नहीं है जिससे मारकाट मच जाए??? ऐसे में सरकार ने क्या किया? क्या ऐसे संगठनों और मिशनरियों पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए????"

कारण को छुपाना और सिर्फ़ उस के परिणामों की निंदा करना ग़लत है. ग़लत परिणाम के कारण की भी निंदा की जानी चाहिए. पोप को तकलीफ होती है ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा से. पर इस किताब में की गई हिंसा से उन्हें तकलीफ नहीं होती. वह इस की निंदा नहीं करते. ऐसा ही हाल, वोट की राजनीति करने वाले नेताओं का है. ख़ुद को धर्मनिरपेक्ष और महान साबित करने को बेकरार कुछ वुद्धिजीवी भी केवल हिन्दुओं को ही गालियाँ दे रहे हैं. यह लोग यह क्यों नहीं समझते की जब तक ईसाई मिशनरी अपनी ग़लत हरकतें बंद नहीं करते तब तक उन के ख़िलाफ़ यह हिंसा बंद नहीं होगी. यह आज की बात नहीं है, न जाने कब से यह चल रहा है. लोग बर्दाश्त करते हैं, पर जब हिंदू धर्म को की जा रही गाली-गलौज हद से बाहर हो जाती तो लोग उस का उत्तर देने को मजबूर हो जाते हैं. किसी धर्म की निंदा करके, उस के अनुयायिओं का धर्म बदल कर, कोई चाहे कि वह मजे से रहेगा तो यह उस का भ्रम है. देर सबेर उसे अपनी इस हिंसा का परिणाम भुगतना ही होगा. क्या हिंदू इंसान नहीं हैं? क्या उन्हें तकलीफ नहीं होती.

हिंसा विचार, शब्द, कर्म तीनों से होती है. हिंसा हर रूप में निंदनीय है. एक तरफा निंदा आग में घी डालने का काम करती है. कोई नहीं जानता मरने के बाद क्या होगा. इस जिंदगी को तो प्रेम से जी लो. ख़ुद भी प्रेम से रहो और दूसरों को भी प्रेम से रहने दो.

प्रेम करो सबसे, नफरत न करो किसी से.

Sunday, October 12, 2008

एक तरफा बात से मुद्दे और उलझते हैं

आज कल आतंकवाद और मजहबी दंगों पर जम कर बहस चल रही है. ज्यादातर लोग एक तरफा बहस कर रहे हैं. इस से मुद्दे सुलझने की बजाय और उलझ रहे हैं. कुछ लोगों की नजर में सारे मुसलमान आतंकवादी हैं. दूसरे कुछ लोगों की नजर में सारी गलती हिन्दुओं की है. यह लोग समाज के हर वर्ग से हैं, पुलिस से हैं, सरकार से हैं, मीडिया से हैं, धर्म गुरु हैं, शिक्षा संस्थानों से हैं. कुछ लोग इन बुराइयों के लिए धर्म को जिम्मेदार करार देते हैं. कुछ लोग पुलिस को गालियाँ देते हैं. सब एक-पक्षीय बात करते हैं. बस अपना पक्ष कहना. दूसरे पक्ष की बात ही सुनना नहीं चाहते यह लोग. क्या इस से यह समस्यायें सुलझेंगी? मेरे विचार में तो नहीं. अगर लोग ऐसे ही चिल्लाते रहे तो समस्यायें और उल्झेंगी.

हिंदू हों, या मुसलमान हों, या ईसाई हों, इसी देश में रहते हैं, और आने वाले समय में भी इसी देश में रहेंगे. क्या इसी तरह लड़ते रहना है या मिल जुल कर रहना है? अगर मिल जुल कर रहना है तो दूसरे की बात भी सुनो, उसे क्या तकलीफ है यह जानने की कोशिश करो. एक तरफा बातें करना बंद करो. नहीं तो लड़ते रहो, आज तुमने उन्हें पटक दिया कल वह तुम्हें पटक देंगे, फ़िर तुम उन्हें पटक देना, बस ऐसे ही करते रहो.

कल राष्ट्रीय एकता परिषद् की मीटिंग है जिसमें तुम्हारे और दूसरों के वोट के इच्छुक पहलवान कुश्ती लड़ेंगे. नफरत के दांव लगायेंगे. एक दूसरे को गालियाँ देंगे. फ़िर तुम्हारी तरफ़ देखेंगे कि तुम उन की कुश्ती से खुश हुए या नहीं. यह तुम्हें तय करना है कि तुम नफरत करते रहोगे या प्रेम से मिल जुल कर रहोगे.

Thursday, October 09, 2008

क्या बुराई बाकई जल जाती है?

दशहरे पर रावण, कुम्भकरण और मेगनाध के पुल जलाए जाते हें यह प्रतीक हें अच्छाई की बुराई पर विजय के पर क्या इन पुतलों को जलाने से बुराई बाकई जल जाती है? आइये इस विजयदशमी पर हम अपने अन्दर की बुराई को पूरी तरह जला दें
आइये एक वीडियो भी देखें।

Tuesday, October 07, 2008

इंसानियत क्या धर्म देख कर जागती है?

ईशर ने सबको इंसान बना कर पैदा किया. वह किसी इंसान में अन्तर नहीं करता. वह सब से प्रेम करता है. प्रेम उस का एक रूप है. पर हमने उसे बाँट दिया. हमने इंसानों को बाँट दिया. अलग-अलग धर्म बना दिए. हर धर्म का एक ईश्वर तय कर दिया. ठीक है. मैं इस में कोई बुराई नहीं देखता, पर बुरा हुआ तब जब हम धर्म और ईश्वर के नाम पर लड़ने लगे, मेरा ईश्वर सही है, मेरा ईश्वर सब से बड़ा है. यह तो ईश्वर की इच्छा के ख़िलाफ़ बात हुई.

हम इंसान हैं. इंसानियत एक ऐसा जज्बा है जो इंसान को ईश्वर की सब से सुंदर रचना बनाता हैं. पर हम ने इंसानियत को इंसान से दूर कर दिया. हमने इंसानियत को एक गहरी नींद सुला दिया. जो तब जागती है जब हमारे धर्म का कोई व्यक्ति मरता है. दूसरे धर्म का व्यक्ति जब मरता है तब यह सोती रहती है. उन के लिए हमने इस का उल्टा रूप हैवानियत तैयार कर रखा है.

अपने धर्म वालों के लिए इंसानियत और दूसरों के लिए हैवानियत. यह आज कल के इंसान का असली रूप बनता जा रहा है.

Sunday, October 05, 2008

रोटी बनाइये ईनाम पाइए

क्या आपको भूख लगी है? भूख सब को लगती है, आप को भी लगी होगी. आइये भूख मिटाने के लिए रोटी बनायें,

एक शर्त है, आप जिस धर्म के हैं उसी धर्म के मानने वाले रोटी बनाने में मदद करेंगे. कभी भी, किसी समय भी किसी गैर धर्म वाले का हाथ यह रोटी बनाने में न लगा हो.

मसलन, अगर आप हिंदू है तो जमीन हिंदू की हो, उस में जो बीज बोया गया हो वह हिंदू द्वारा तैयार किया गया हो, बीज बोने वाले हिंदू हों, जो पानी इस्तेमाल किया गया हो वह हिंदू का हो, जो हल इस्तेमाल किया गया हो वह हिंदू का हो, हल बनाने में जो समान इस्तेमाल किया गया हो वह हिंदू का हो और हिंदू द्वारा ही तैयार किया गया हो, इस हिंदू गेहूं को पीसने वाले हिंदू हों, इस हिंदू आटे को गूंथने के लिए जो पानी इस्तेमाल किया जाय वह हिंदू का हो, बर्तन हिंदू द्वारा बनाये गए हों, चकला-बेलन, चिमटा हिंदू का हो, तवा हिंदू का हो, ईंधन हिंदू का हो, इत्यादि-इत्यादि.

अगर आप मुसलमान हैं तो सब कुछ मुस्लिम होना चाहिए. अगर आप ईसाई हैं तो सब कुछ ईसाई.

इन सब शर्तों के साथ जो रोटी बनाएगा उसे ईनाम मिलेगा.

आइये, हिंदू, मुस्लिम, क्रिस्चियन रोटी बनाइये और ईनाम पाइए.

Thursday, October 02, 2008

ईद मुबारक, ईद मुबारक, ईद मुबारक ........

आप सबको ईद मुबारक। इन्हें आप एसएम्एस के रूप में भेज सकते हें. फ़िर देखिये नीचे एक वीडियो।

मुबारक नाम है तेरा,
मुबारक ईद हो तुझको,
जिसे तू देखना चाहे उसी की दीद हो तुझको,
ईद मुबारक.

कोई इतना चाहे तुम्हे तो बताना,
कोई तुम्हारे इतने नाज़ उठाये तो बताना,
ईद मुबारक तो हर कोई कह देगा तुमसे,
कोई हमारी तरह कहे तो बताना.
ईद मुबारक

जब कभी बिन मांगे आप पर खुशिओं की बरसात हो,
जब कभी आप का दिल अनजानी खुशी से बेताब हो,
तो समझ लेना कोई आप को दुआओं मैं याद कर रहा है.
ईद मुबारक

ईद लेके आती है ढेर सारी खुशिया ,
ईद मिटा देती है इंसान में दूरियां,
ईद है खुदा का एक तोहफा,
इसी लिए कहते है सब,
ईद मुबारक.

आज से अमीरी गरीबी के फासले न रहे,
हर इंसान एक दूजे को अपना भाई कहे,
आज सब कुछ भूल कर आ गले लग जा,
मुबारक हो तुझे यह ईद का त्यौहार.

आज खुदा की हम पर हो मेहरबानी,
करदे माफ़ हम लोगो की सारी नाफ़रमानी,
ईद का दिन आज आओ मिलके करे यही वादा,
खुदा की ही राहो में हम चलेंगे सदा.
सबको ईद मुबारक

सुनहरी धूप बरसात के बाद ,
थोडी सी खुशी हर बात के बाद,
उसी तरह हो मुबारक आप को ये नई सुबह कल रात के बाद,
ईद मुबारक.

सदा हँसते रहो जैसे हँसते हैं फूल,
दुनिया के सारे गम तुम्हें जाए भूल,
चारों तरफ़ फैलाओ खुशिओं के गीत,
ऐसी उम्मीद का साथ यार तुम्हे...
मुबारक हो ईद.

ईद मुबारक हो आपको,
ढेर सारी तारीफ़ और खुशिया मिले आपको,