दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.

Saturday, December 27, 2008

भिक्षाम देही

साईं बाबा अपने भक्तों के घर जाकर आवाज लगाते थे - भिक्षाम देही. भक्त बाहर आते और जो कुछ घर में होता बाबा के अर्पण करते. बाबा अपनी झोली का मुंह खोल देते, भिक्षा झोली में आ जाती, और साथ ही झोली में आ जाते भक्तों के दुःख और कष्ट. 

एक बार कुछ लोगों के चढाने पर आयकर अधिकारी बाबा कि संपत्ति का लखा-जोखा करने आए. शिकायत थी कि बाबा के पास अगाध धन है पर वह एक पैसा भी आयकर नहीं देते. बाबा आयकर अधिकारी के रहने की जगह पहुँच गए भिक्षा मांगने, पर उस ने कुछ नहीं दिया. कुछ समय पश्चात् आयकर अधिकारी को सत्य का ज्ञान हुआ. बाबा फ़िर आ गए भिक्षा मांगने. इस बार आयकर अधिकारी ने उन्हें भिक्षा दी और भिक्षा के साथ आयकर अधिकारी  का पेट का दर्द भी झोली में आ गया. 

ऐसे थे साईं बाबा. सब का मालिक एक है. 

Thursday, December 25, 2008

Sunday, December 14, 2008

तुम अपनी पूजा करो

लोग अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा करते हैं. सब के पूजा करने के अपने अलग तरीके हैं. सबका अपना विश्वास है कि इस तरह पूजा कर के वह अपने भगवान् को पा सकेंगे. 

सब अपनी आस्था के अनुसार पूजा करें, और दूसरों को उनकी आस्था के अनुसार पूजा करने दें. किसी और की पूजा पद्धति से किसी दूसरे को तकलीफ क्यों हो? 

कुछ लोग मूर्ति पूजा करते हैं, कुछ नहीं. जो मूर्ति पूजा करते हैं उन्हें कोई तकलीफ नहीं कि दूसरे पूजा कैसे करते हैं. लेकिन कुछ लोग, जो मूर्ति पूजा नहीं करते, परेशान रहते हैं कि कुछ लोग मूर्ति पूजा क्यों करते हैं. यह लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते, इस में कोई ग़लत बात नहीं है, लेकिन जब यह लोग मूर्ति पूजा का विरोध करने लगते हैं तब समस्या पैदा हो जाती है. मूर्ति पूजा न करने वालों को इस ग़लत बात से बचना चाहिए. 

तुम अपनी पूजा करो, दूसरों को उन की पूजा करने दो. सब का मालिक एक है. 

Wednesday, December 10, 2008

भगवान की प्राप्ति कैसे हो?

अक्सर लोग ऐसा कहते हैं कि भगवान की दया तो सभी पर समान भावः से है, फ़िर सबको भगवान की प्राप्ति क्यों नहीं होती? 

इस में कोई संशय नहीं कि भगवान की पूर्ण दया सभी पर समान भाव से है. किंतु जैसे कोई दरिद्र व्यक्ति अपने घर में गढ़े हुए धन को न जानने के कारण तथा पास में पड़े हुए पारस को न जानने के कारण लाभ नहीं उठा सकता, बैसे ही अज्ञानी लोग भगवान को और भगवान की दया के रहस्य को न जानने से भगवान प्राप्ति का लाभ नहीं उठा सकते. भगवान की दया के रहस्य को समझने से शोक और भय का अत्यन्त अभाव हो जाता है, सदा के लिए परम शान्ति एवं परमानन्द की प्राप्ति हो जाती है. भीष्म, युधिष्ठिर, अर्जुन आदि भगवान की दया के रहस्य को जानते थे, इसलिए वह कृतकृत्य हो गए, किन्त अज्ञान के कारण दुर्योधन आदि न हो सके. 

भगवान और भगवान की दया के रहस्य को जानने का सबसे सरल उपाय है - भगवान् की अनन्य शरण हो जाना:
१. भगवान के किए प्रत्येक विधान में प्रसन्नचित्त रहना, 
२. निष्काम प्रेम-भाव से नित्य-निरंतर उस के स्वरुप का चिंतन करते हुए उसके नाम का जप करना एवं उसकी आज्ञा का पालन करना,
३. जो व्यक्ति भगवान के प्रभाव एवं तत्व को जानने वाले हैं तथा जो भगवान् की अनन्य शरण हो चुके हैं, ऐसे प्रेमी भक्तों का संग करके, उनके बतलाये हुए मार्ग के अनुसार चलना.

गीता में भगवान ने स्वयं अर्जुन से कहा है - "हे अर्जुन, जो मनुष्य केवल मेरे लिए, सब कुछ मेरा समझता हुआ, यज्ञ, दान और तप आदि सम्पूर्ण कर्तव्य कर्मों को करने वाला है और मेरे परायण है, अर्थात मेरे को परम आश्रय और परमगति मान कर, मेरी प्राप्ति के लिए तत्पर है तथा मेरा भक्त है अर्थात मेरे नाम, गुण, प्रभाव और रहस्य के श्रवण, कीर्तन, मनन, ध्यान और पठन-पाठन का प्रेम सहित, निष्काम भावः से निरंतर अभ्यास करने वाला है और आसक्ति रहित है अर्थात स्त्री, पुरूष और धन आदि सम्पूर्ण सांसारिक पदार्थों में स्नेह रहित है और सम्पूर्ण भूत प्राणियों में  वैरभाव से रहित है, ऐसा वह अनन्य भक्ति वाला मनुष्य मेरे को ही प्राप्त होता है." 

Tuesday, December 09, 2008

सब मुस्लिम भाई-बहनों को हेप्पी ईद-उल-जुहा

ईद-उल-जुहा इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है । यह त्यौहार पैगम्बर इब्राहीम द्वारा दिखाई गई बलिदान की भावना का त्यौहार है. यह इंसान के मन में ईश्वर के प्रति विश्वास की भावना को बढ़ाता है. परस्पर प्रेम, सहयोग और ग़रीबों की सेवा करने का आनंद इस त्यौहार के साथ जुड़ा हुआ है. 

भारत और भारत से बाहर रहने वाले मुस्लिम भाई और बहनों को मेरी और से हेप्पी ईद-उल-जुहा. 

Saturday, December 06, 2008

कबीरा कहिन

कबिरा प्याला प्रेम का, अंतर लिया लगाय ।
रोम रोम में रमि रहा, और अमल क्या खाय ॥

जल में बसै कमोदिनी, चंदा बसै अकास ।
जो है जाको भावता, सो ताही के पास ॥

प्रीतम के पतियाँ लिखूँ, जो कहुँ होय बिदेस ।
तन में मन में नैन में, ताको कहा सँदेस ॥

नैनन की करि कोठरी, पुतली पलँग बिछाय ।
पलकों की चिक डारिकै, पिय को लिया रिझाय ॥

भक्ति भाव भादों नदी, सबै चलीं घहराय ।
सरिता सोइ सराहिये, जो जेठ मास ठहराय ॥

लागी लागी क्या करै, लागी बुरी बलाय ।
लागी सोई जानिये, जो वार पार ह्वै जाय ॥

जाको राखे साइयाँ, मारि न सक्कै कोय ।
बाल न बाँका करि सकै, जो जग बैरी होय ॥

नैनों अंतर आव तूँ, नैन झाँपि तोहिं लेवँ ।
ना मैं देखी और को, ना तोहि देखन देवँ ॥

सब आए उस एक में, डार पात फल फूल ।
अब कहो पाछे क्या रहा, गहि पकड़ा जब मूल ।।

लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल ।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल ॥

कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढ़ै बन माहिं ।
ऐसे घट में पीव है, दुनिया जानै नाहिं ॥

सिर राखे सिर जात है, सिर काटे सिर होय ।
जैसे बाती दीप की, कटि उजियारा होय ॥

जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ, गहिरे पानी पैठ ।
जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ ॥

बिरहिनि ओदी लाकड़ी, सपचे और धुँधुआय ।
छुटि पड़ौं या बिरह से, जो सिगरी जरि जाय ॥

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं ।
प्रेम गली अति साँकरी, ता मैं दो न समाहिं ॥

इस तन का दीवा करौं, बाती मेलूँ जीव ।
लोही सींचीं तेल ज्यूँ, कब मुख देखीं पीव ॥

हेरत-हेरत हे सखी, रह्या कबीर हिराइ ।
बूँद समानी समँद में, सो कत हेरी जाइ ॥

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।
पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर ॥

धीरे-धीरे रे मना, धीरज से सब होय ।
माली सींचै सौ घड़ा, ऋतु आये फल होय ॥

दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय ।
बिना जीव की स्वाँस से, लोह भसम ह्वै जाय ॥

ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोय ।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय ॥

जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोउ तू फूल ।
तोकि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल ॥

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय ।
मैं भी भूखा ना रहूँ, साधु न भूखा जाय ॥

माटी कहै कुम्हार सों, तू क्या रौंदै मोहिं ।
इक दिन ऐसा होइगा, मैं रौंदोंगी तोहिं ॥

माली आवत देखिकै, कलियाँ करीं पुकार ।
फूली-फूली चुनि लईं, कालि हमारी बार ॥

Thursday, December 04, 2008

आवाज दो हम एक हैं

मुंबई में हिंदू मरे, मुसलमान मरे, यहूदी मरे, गरीब मरे, अमीर मरे, आम आदमी मरे, खास आदमी मरे, बच्चे मरे, बड़े मरे, औरतें मरीं, सुरक्षा कर्मी मरे. गोली ने यह नहीं पूछा कि तुम किस धर्म के हो, समाज के किस वर्ग के हो, बस लगी और जिंदगी ख़त्म. 

जब जिन्दा थे तो भेद-भाव करते थे. अब मौत ने सबको एक कर दिया. आओ इस से सबक लें. जिंदगी में भी एक हो जाएँ. मिटा दें सारे भेद-भाव. सबसे प्रेम करें. एक-दूसरे का दर्द महसूस करें. एक जुट होकर आतंकवाद का मुकाबला  करें.