दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.

Monday, November 10, 2008

मन्दिर








मेरी एक क्लाइंट कंपनी में उन्होंने एक मन्दिर बनाया हुआ है. सुबह सब कर्मचारी काम शुरू करने से पहले मन्दिर में पूजा करते हैं. यह तस्वीरें मैंने एकादशी के दिन खींची थी. 


6 comments:

सुप्रतिम बनर्जी said...

सब अच्छे संस्कार का नतीजा है।

manvinder bhimber said...

ye to achcha hai

Mired Mirage said...

अच्छा है परन्तु तब तक ही जब तक कर्मचारी यह ना महसूस करने लगें कि मन्दिर जाना भी कम्पनी की संस्कृति का हिस्सा है और यदि वे नहीं जाएँगे तो यह मैनेजमेंट को पसन्द नहीं आएगा । बहुधा ऐसा भी होता है और यह सब करना एक अलिखित कानून सा बन जाता है ।
घुघूती बासूती

mehek said...

sundar mandir aur bhav bhi

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छा लगा
धन्यवाद

Anil Pusadkar said...

अच्छी पहल है। अच्छी बातों को सामने लाने मे मैने मह्सूस किया है कि आप कभी पिछे नही रहते।बधाई आपको,अच्छी पोस्ट के लिये।