प्रेम और नफरत, बुराई और भलाई के बारे में कुरान कहती है:
''बुराई को भलाई से दूर करो'' (क़ुरान 28 :54)
''और जो शख्स सब्र से काम ले और दूसरे के कसूर को माफ कर दे तो बेशक यह बड़ी हिम्मत का काम है।'' (क़ुरान 42 :43)
''बेशक अल्लाह तुम्हें इंसाफ़ और नेक काम करने का हुक्म देता है।'' (क़ुरान 16 :90)
"क़ुरान में जगह-जगह लोगों को सब्र करने और माफ़ करने की ताकीद की गई है। क़ुरान में 85 जगह अल्लाह को माफ़ करने वाला कहा गया है। अल्लाह ने अपने नबी से कहा है कि ''ऐ पैगम्बर! ईमान वालों से कह दो कि वे उनको भी माफ कर दिया करें जो अल्लाह के कर्म परिणामों की उम्मीद नहीं रखते, ताकि लोगों को उनकी करतूतों का बदला मिले। जो कोई अच्छा काम करता है तो अपने लिए ही करेगा और जो कोई बुरा काम करता है तो उसका बवाल उसी पर होगा। फिर तुम अपने रब की तरफ लौटाए जाओगे।'' (क़ुरान 45 : 14-15)
पर हो क्या रहा है? जो समझते हैं और समझा सकते हैं वही शिक्षित मुसलमान आज इन नसीहतों पर अमल नहीं कर रहे हैं.
हे भाई और बहनों, प्रेम करो नफरत नहीं.





12 comments:
''बेशक अल्लाह तुम्हें इंसाफ़ और नेक काम करने का हुक्म देता है।'' (क़ुरान 16 :90)
पर हो क्या रहा है?
"sach kha aapne, kuran mey jo likha hai, aajkal log unka palan nahee krty....ab ye aaytyn sirf likhee reh gyee hain, kagaj ke paanon pr..."
Regards
कुरान क्या कहती है ग़लत
कुरान कया कहता है सही
पुस्तक तो सिर्फ पढ़ने के लिए है, बाक़ी सब अपने अपने दिल की मानते हैं।
कुरान में सही लिखा है...लेकिन लोग उस पर नही चलते..कारण भारत के अधिकांश मुसलिम अशिक्षित व गरीब हैं..आप से अनुरोध है कि आप वेद व बाइबिल पर ऱोशनी डाले.....
शुएब जी, पुस्तक हिन्दी में स्त्रीलिंग है इस लिए मैंने 'कुरान क्या कहती हे?' लिखा. अगर इसको 'कुरान क्या कहता है?' लिखना चाहिए तब मुझे बताइयेगा, में गलती उधार लूँगा.
आदिल फारसी जी, यही सब वेदों और बाइबल में भी लिखा है पर इस पर अमल करने वाले कम होते जा रहे हैं, और इन कम होने वालों में शिक्षित लोग ज्यादा हैं.
आपकी और टिप्पणीकर्ताओं की बातों का जवाब अपने ब्लॉग पर दे दिया है. कृपया तशरीफ़ लाएँ.
सुंदर प्रस्तुति
अपने ब्लॉग की प्रविष्टियों पर आपकी टिप्पणियों के लिए आभार. सिर्फ़ इतना कहना चाहूँगा कि Shaw और Emerson जैसे लोगों पर राय व्यक्त करने के पहले उन्हे पढ़ लेना उचित होगा. Einstein, Carl Sagan, Darwin, Bertrand Russell, Thomas Jefferson, Oscar Wilde, बुद्ध और कबीर सभी की धर्म के प्रति यही राय थी. अब भावुकतावश इन सभी को बेवक़ूफ़ या कम अक़्ल मत कह दीजिएगा. इन लोगों को बिना पढ़े या बिना जाने इन पर की गयी टिप्पणी, इन लोगों की कम, टिप्पणीकर्ता की अक़्ल को अधिक उजागर करती है.
सच है की हर धार्मिक पुस्तक यही कहती है .......पर कड़वा सच यही है की हम लोग अपने हितों के अनुरूप इन बातों को अपने तर्कों में बदलने की कोशिश करते हैं .
सुरेश जी कुरान ही नही सभी धार्मिक पुस्तके यही कहती है, लेकिन कोई नही मानता उस **ऊपर वाले की बात को*** सभी मानते है उस ऊपर वाले कॊ.जेसे एक नायलक बेटा अपने बाप को तो बाप मानता है, लेकिन उस का कहना नही मानता??
धन्यवाद
श्रीमान जी,
कहती या कहता कि बहस से मुझे प्रेरणा मिलि कि मैं आप महानुभव को लिखूं कि असल शब्द क़ुरआन है, देखें क़ुरआन के अनुवाद की एकमाञ हिन्दी वेबसाइट quranhindi dot com
इंग्लिश में quran लिखा देखकर कोई कुरान तो कोई कूरान और हिन्दी में लिखा देखकर फिर वापस इंग्लिश मे अर्थात रोमन में गलत koran , kuran लिख रहा है , जिस किताब के बारे में बात कर रहे हो उसका नाम सही से देना भी आपकी जिम्मेदारी है
धार्मिक सौहार्द पर लाजवाब काम किया है आपने, बधाई, कुछ हम भी लिये बैठे हैं, इस ब्लाग के मतलब का कुछ वहाँ मिले तो उठा लाईये झिझकिये नही, हमारा मकसद एक अर्थात भारत में प्रेम का बोलाबाला करना है तो फिर किया तेरा, किया मेरा,
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मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध् मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्टा
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इस्लामिक पुस्तकों के अतिरिक्त छ अल्लाह के चैलेंज
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