दैनिक प्रार्थना

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Tuesday, September 23, 2008

क्यों हो रहे हैं हमले चर्चों पर?

किसी भी धार्मिक स्थान पर हमला करना ईश्वर के प्रति अपराध है.
पर जहाँ जगह मिली, सरकारी जमीन पर भी, मन्दिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा बना देना भी अपराध है.
क्या मन्दिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा की संख्या कम है इस देश में, कि जहाँ मौका मिलता है नया बनाना शुरू कर देते हैं?
किसी को कोई तकलीफ नहीं अगर सब अपने-अपने धर्म के अनुसार आचरण करें और दूसरों को उन के धर्म के अनुसार आचरण करने दें.
पर अगर कुछ धर्मों के लोग दूसरों के धर्म में हस्तक्षेप करने लगें तो यह ग़लत है. इस से दूसरों को तकलीफ होती है. जब यह तकलीफ सहन शक्ति से बाहर हो जाती है तो वह विरोध करते हैं.
अगर किसी धर्म के अनुयायी यह कहते हैं कि उन का धर्म उन्हें दूसरों का धर्म बदलने की आज्ञा देता है तो यह ग़लत है.
किसी को किसी का धर्म बदलने का अधिकार नहीं है.
कोई गरीब है, कोई तकलीफ में है, इसलिए उसे कहा जाय कि तुम अपना धर्म बदल लो तो हम तुम्हारी मदद करेंगे, यह भी ईश्वर के प्रति अपराध है. क्या इन का धर्म यह कहता है कि केवल अपने धर्म वालों की मदद करो? किसी दूसरे धर्म वाले की मदद तब करो जब तो तुम्हारे धर्म में शामिल हो जाए. यह तो धर्म नहीं है. यह तो बहुत ग़लत बात है.
आज चर्चों पर हमले हो रहे हैं. इस की खूब निंदा की जा रही है. की भी जानी चाहिए. पर साथ ही धर्म बदलने की भी निंदा की जानी चाहिए. कोई इस की निंदा क्यों नहीं करता? लोग कारण के परिणाम को ग़लत कहते हैं, कारण को ग़लत क्यों नहीं कहते?
अल्पसंख्यकों को अपने धर्म के अनुसार आचरण करने की पूरी आज़ादी है इस देश में. पर अगर यह अल्पसंख्यक बहुसंख्यकों का धर्म बदलने का षड़यंत्र करेंगे तो उस का अगर अनपेक्षित परिणाम भुगतना हुआ तो इस के लिए यह ख़ुद जिम्मेदार हैं. अगर बबूल बोयेंगे तो आम नहीं मिलेंगे, बबूल ही मिलेगा.
धर्म परिवर्तन बंद कीजिए, चर्चों पर हमले बंद हो जायेंगे.

6 comments:

परमजीत बाली said...

बिल्कुल सही कहा-

"आज चर्चों पर हमले हो रहे हैं. इस की खूब निंदा की जा रही है. की भी जानी चाहिए. पर साथ ही धर्म बदलने की भी निंदा की जानी चाहिए. कोई इस की निंदा क्यों नहीं करता? लोग कारण के परिणाम को ग़लत कहते हैं, कारण को ग़लत क्यों नहीं कहते?"

Deepak Bhanre said...

अच्छा लिखा है .
क्या करें हमेशा अल्प्संख्योंका की ही दुःख तकलीफ लोगों को नजर आती है . और बहुसंख्यक का हमेशा का दोष .

अनुनाद सिंह said...

चर्चों की गन्दी राजनीति के कारण ही पश्चिम में 'सेक्युलरवाद' का कांसेप्ट लाया गया। आज भारत में चर्च हराम के विदेशी पैसे से देश को फ़िर 'सांस्कृतिक गुलामी' की तरफ़ ले जाना चाहता है। उनके इस कृत्य की भर्त्सना होनी चाहिये। इससे देशवासियों को सावधान रहना चाहिये; इनके कृत्यों पर सबको कड़ी नजर रखनी चाहिये। भोले-भाले लोगों को उल्लू बनाने से इन्हें रोकना ही चाहिये। इनके विद्यालयों में चर्च की उपस्थिति की अनुमति नहीं दी जानी चाहिये।

संजय बेंगाणी said...

एक वाक्य में कहूँ तो भारत को नष्ट किया जा रहा है...

राज भाटिय़ा said...

इस भारत मे जो नही होना चाहिये वह सब हो रहा हे, ओर करने वाले हम खुद ही हे, आप का लेख बहुत ही सटीक हे हमॆशा की तरह, आप ने सब कुछ साफ़ लिखा हे.
धन्यवाद

सतीश सक्सेना said...

धर्म परिवर्तन का प्रयत्न निंदनीय है , हाँ कोई स्वेच्छा से करना चाहे तो मना नही होना चाहिए !