दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.

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Saturday, September 26, 2009

खुदा का मजहब क्या है?

खुदा हिन्दू है या मुसलमान?
ईसाई, सिख, बौध या जैन?
मेरा सोच कुछ अलग है,
खुदा का कोई मजहब नहीं होता,
खुदा किसी के लिए मजहब नहीं चुनता,
मजहब बनाये है इंसान ने,
और बंद कर दिया है खुदा को,
अपने मजहब की दीवारों में,
कोई फर्क नहीं पड़ता खुदा को,
कौन किस धर्म को मानता है,
और उसे किस नाम से पुकारता है,
खुदा मानता है प्रेम के सम्बन्ध को,
जो इंसान दूसरे इंसानों को प्रेम करता है,
खुदा उसे प्रेम करता है,
प्रेम करो सब से,
नफरत न करो किसी से,
सब का मालिक एक है.

Thursday, September 10, 2009

ईश्वर की सच्ची पूजा

मानवीय संबंधों का आदर करो,

परिवार के प्रति कर्तव्यों का पालन करो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

बड़ों का आदर करो,
उनके सुख दुःख का ध्यान रखो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

बच्चों से प्रेम करो,
उन्हें सही शिक्षा दो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

पड़ोसियों से प्रेम करो,
उनके लिए परेशानी का कारण मत बनो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

समाज, राष्ट्र के प्रति बफादार रहो,
उन पर वोझ नहीं, सहायक बनो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

किसी से नफरत नहीं, सबसे प्रेम करो,
हर जीव में ईश्वर का दर्शन करो,
यही ईश्वर की सच्ची पूजा है.

ईश्वर प्रेम है, प्रेम ईश्वर है,
प्रेम ईश्वर की सच्ची पूजा ह

Thursday, March 13, 2008

भगवान् से मुलाकात


कल अचानक ही हो गई
भगवान् से मुलाकात,
पूछने लगे कैसे हो,
अच्छा हूँ मैंने कहा,
क्या सचमुच?
हाँ सचमुच, कहा मैंने
खूब तरक्की कर रहा है भारत, कहा मैंने
क्या सचमुच?
मुझे लगा कुछ गड़बड़ है,
ध्यान से देखा तो घबराया,
उनके चेहरे पर कुछ दर्द नजर आया,
आप कुछ परेशान हैं? मैंने पूछा,
मैंने तो प्रेम बनाया था,
नफरत कहाँ से ले आए तुम इंसान?
लड़ते हो आपस मैं,
मारते हो एक दूसरे को,
कौन पिता चाहेगा,
मारें उसके बच्चे एक दूसरे को?
पर क्या यह काफ़ी नहीं था?
तुम तो और आगे निकल गए,
घसीट लिया मुझे बीच मैं,
मेरे नाम पर करते हो हिंसा,
सोचते हो मैं खुश होऊंगा तुमसे?
काम करते हो शैतान का,
नाम लेते हो भगवान् का,
बंद करो यह हिंसा वरना पच्ताओगे,
जहन्नुम की आग् मैं फैंक दिए जाओगे.
डर से मैंने आँखें बंद कर ली,
खोली तो मैं अकेला था.
फ़िर एक आवाज आई,
प्रेम करो सब से,
नफरत न करो किसी से.

Friday, July 06, 2007

They are Allah's criminals, will sure get hell

Those who kill fellow human beings in the name of Allah are criminals in the eyes of Allah. On the day of judgment they will sure be thrown into the fire of hell.

Who can say this? - "Kill those who have no faith in me." Allah or Shaitan? Allah is all loving. He has created human beings to love and not to hate. Even thinking in dreams that Allah wishes us to do this,is a crime against Him. Only a Shaitan can say this. Those who claim that are Allah's followers are in fact the followers of Shaitan.

We are all children of God. We perceive God as Allah, Jesus, Wahe Guru, Bhagwan, Buddha, Mahavira..... We try to reach Him in different ways as taught in our religions. There can be no cause for hatred amongst human beings. When He does not discriminate btween His chikldren then how can we discriminate?

Sab Ka Maalik ek hai. Love all , hate none.

Religious symbols, Left to right: Row 1. Christian, Jewish, Hindu    Row 2. Islamic, Buddhist, Shinto  Row 3. Sikh, Baha'i, Jain
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Row 1. Christian, Jewish, Hindu
Row 2. Islamic, Buddhist, Shinto
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