दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.

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Sunday, September 21, 2008

तुम्हारा धर्म क्या है, यह कौन तय करेगा?

प्रेम ईश्वर का धर्म है.
नफरत शैतान का धर्म है.
यह तुम्हें तय करना है,
कि तुम किस धर्म के हो?

आतंकवादियों को तुम्हारे धर्म को बदनाम मत करने दो.
नेताओं को तुम्हारे धर्म से खिलबाड़ मत करने दो.
आतंकवादी किस के दुश्मन हैं?, पहचानो.
कभी कोई नेता मरा है बम धमाको में?
जो मरे वह आम आदमी थे, तुम्हारे जैसे.
वह तुम भी हो सकते थे.
वह हिंदू भी थे, मुसलमान भी.
सिख भी और ईसाई भी.

आतंकवादी आम आदमी के दुश्मन हैं.
तुम यह क्यों नहीं समझते?
वह लड़ाना चाहते हैं हिंदू और मुसलमानों को.
यही नेता भी चाहते हैं.
पिछले साठ-सत्तर सालों से वह यही कर रहे हैं.
हर बम धमाके के बाद वह तिलमिला जाते हैं.
क्योंकि उनका मकसद पूरा नहीं होता.
कितने आम आदमी मर जाते हैं.
पर हिंदू-मुस्लिम झगड़ा नहीं होता.
मैं नमन करता हूँ आम आदमी को,
वह मर जाता है पर इन का मकसद पूरा नहीं होने देता.

मुझे यही तकलीफ हमेशा होती है.
कि तुम अपने दुश्मनों को अभी भी नहीं पहचान रहे.
आतंकवादी तुम्हारे दुश्मन हैं.
आतंकवादी और नेता एक सिक्के के दो पहलू हैं.
आम आदमी का दोस्त केवल आम आदमी है.
जो हिंदू है, मुसलमान भी,
सिख भी है और ईसाई भी.
यह सीधी सी बात तुम्हारी समझ में क्यों नहीं आती?