दैनिक प्रार्थना

हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.

Sunday, August 13, 2006

Bhagwan aur Insaan

Aajkal Woh rehta hai bahut pareshan,
Insaan ne rakh diye hain uske alag alag naam,
Koi kehta hai Allah, Koi Jesus,
Koi Wahe Guru aur koi Bhagwan,
Maar rahe hain ek doosre ko,
Lekar uska naam,
Kisne sikha di inhe nafrat,
Maine to banai thi sirf mohabbat.

3 comments:

Suresh Gupta said...

Usne banaya tha dharma ek,
Insann ne bana diye anek,
Prem, sachchai, paropkar,
Sabke ke saath mridul vyavhar,
Ahimsa, dosti aur bhaichara,
In se bhara tha Usne sansar saara,
Insaan ne badal diya sansar,
Himsa, bhrashtachar aur atyachar,
Aadmi ban gaya shaitan,
Khojne par nahin milta ab insaan.

Suresh Gupta said...

भगवान और इंसान
एक रचयिता, एक रचना

एक अजंमा और अनंत,
एक जन्म लेता इस जग मै

फिर हो जाता उसका अंत

जन्म मृत्यू के इस चक्कर मै
गोल घूमता है इंसान

प्यार, सत्य और परोपकार से
करता अपना जीवन धन्य

पा जाता है फिर भगवान.

Suresh Gupta said...

एक गांव में अक्सर हिन्दू मुस्लिम झगड़े होते थे. एक दिन एक संत आया और गांव के बाहर बरगद के पेड़ के नीचे वैठ गया. एक हिन्दू ने मंदिर के पंडित को खबर दी कि साधू महाराज आऐ हैं. एक् मुसलमान ने मस्जिद के मौलवी को खबर दी कि एक फकीर बाबा आए हें.दोनो पंडित और मौलवी अपनी अपनी जाति के लोगों को लेकर संत के पास आए. पंडित ने नमस्कार किया और मौलवी ने आदाब.

आप ने बड़ी मेहरबानी की कि हमारे गांव में आए. बताइये हम आपकी क्या सेवा करें? संत ने कहा प्यासा हूं पानी पिला दो, भूखा हूं रोटी खिला दो. पंडित और मौलवी दोनो ने अपने अपने लोगों से पानी और रोटी लाने को कहा. जब लोग जाने लगे तब संत ने कहा कि एक शर्त है जो पानी और रोटी तुम लेकर आओगे वह केवल तुम्हारे अपने मजहब के लोगों ने बनाई हो, किसी और मजहब के लोगों का हाथ उसमें न लगा हो. लोगों की समझ में नहीं आया तब संत ने समझाया कि अगर रोटी पंडित जी लाते हैं तब उसको बनाने में केवल हिन्दुओं के हाथ ही लगे हो. गैंहू उगाने से लेकर रोटी पकाने तक किसी मुसलमान ने अपना हाथ न लगाया हो. ऐसा ही तब होना चाहिये जब मौलवी रोटी लेकर आयें.

लोग पानी और रोटी लेने चले गये. सारे गांव में घूमकर वापिस आ गये पर ऐसा पानी और रोटी नहीं मिली. लोग परेशान थे और संत मुस्कुरा रहे थे. फिर संत ने कहा में तुम्हारे गांव से भूखा और प्यासा जा रहा हूं. ईश्वर या अल्लाह जो भी है तुम पर रहम करे. लोग दुखी हो गये. उन्होनें संत के पैर पकड़ लिये और रोने लगे.अगर आप भूखे और प्यासे हमारे गांव से चले गये तब ऊपर वाला हम पर नाराज होगा. न जाने क्या सजा देगा?

संत ने समझाया ऊपर वाला एक है. तुम लोगो ने उस्के अलग अलग नाम रख दिये हैं. कोई अल्लाह कहता है तो कोई ईश्वर. यहां तक तो ठीक था पर तुम लोग इन नामों को लेकर आपस में लड़्ने भी लगे. एक दूसरे को मारने लगे. तुम गलत सोचते हो कि ऊपरवाला इससे खुश होता है. उसके बच्चे उसका नाम लेकर आपस में लड़ें यह वह कभी बरदाश्त नहीं कर सकता. मर कर जब उसके पास जाओगे तब वह तुम्हें केवल सजा ही देगा.

बात लोगों की समझ में आ गयी. उन्होने संत से वा्दा किया कि अब वह आपस में नहीं लड़ेंगे और प्यार से एक दूसरे के साथ रहेंगे. संत ने कहा जाओ और हिन्दू और मुसलमान दोनो मिलकर मेरे लिये पानी और रोटी लेकर आओ. ळोग म्ल्क्कर पानी और रोटी लाये. संत ने खुश होकर रोटी खाई, पानी पिया और आराम से लेट गये.

कहानी कहती है कि उस दिन के बाद उस गांव में कोई झगड़ा नहीं हुआ.