दैनिक प्रार्थना

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Friday, July 25, 2008

सड़क दुर्घटना, जन संपत्ति का नुक्सान और हिंसक हिंदू धर्म

मुराद अली बैग एक लेखक हैं. इन्होनें कई किताबें लिखी हैं धर्म पर. आज एक अखबार में उनका एक लेख छपा है जिसका शीर्षक है 'वायोलेंट रिलीजन' यानी 'हिंसक धर्म'. यह लेख श्रावण मास में कांवरियों द्बारा गंगाजल लाने के बारे में है. लेख में कुछ अच्छी बातें लिखी हैं, पर कुछ ऐसी बातें भी हैं जिन्हें अगर न लिखा जाता तो अच्छा होता.

पहली ग़लत बात तो है इस लेख का शीर्षक.
१) अगर कांवरियों के गंगाजल लेकर घर लौटने से हरिद्वार-दिल्ली मार्ग पर ट्रेफिक अवरुद्ध हो जाता है और प्रशासन इस मार्ग को अन्य यात्रिओं के लिए बंद कर देता है तो हिंदू धर्म को हिंसक धर्म कह देना क्या सही है? यह बात ध्यान रखने की है कि एक अन्य मार्ग से हरिद्वार-दिल्ली के बीच आवागमन चलता रहता है. रास्ते तो मुहर्रम का जलूस निकालने के लिए भी बंद किए जाते हैं. क्या इस से इस्लाम एक हिंसक धर्म हो जाता है?
२) सड़क पर दुर्घटनाएं होती हैं। इन कांवरियों के आने के दौरान भी दुर्घटनाएं हो जाती हैं। यह दुखद है। इन दुर्घटनाओं से क्रोधित होकर कांवरियों द्बारा जन-संपत्ति को नुकसान पहुंचाना ग़लत है, पर क्या इस के कारण हिंदू धर्म को हिंसक धर्म कह देना सही है? सड़क दुर्घटनाओं से क्रोधित होकर जनता द्बारा जन-संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं. पर इस के लिए कभी किसी को किसी धर्म को हिंसक करार देते नहीं सुना. गाजियाबाद लोनी में एक विवादास्पद स्थल पर जब पुलिस ने एक मस्जिद के गैरकानूनी निर्माण को रोका तो भीड़ ने पुलिस पोस्ट को जला दिया और पुलिस स्टेशन को जलाने का प्रयास किया. क्या मुराद जी इस्लाम को हिंसक धर्म कहेंगे? क्या इस्लामिक जिहाद के नाम पर जब मुसलमान आतंकवादी हमले करके अनेक निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार देते हैं तब मुराद जी इस्लाम को हिंसक धर्म नहीं कहते.

मुराद जी ने कांवरियों द्बारा गंगाजल लाने को एक खोखली प्रथा, धर्मान्धता और अंधविश्वास की संज्ञा दी है. उन्होंने आगे यह कहा है कि इन्हीं ग़लत बातों के कारण कुछ महापुरुष नए धर्मों की नीव डालते हैं. इस सिलसिले में उन्होंने मुहम्मद द्बारा इस्लाम की नीव डालने का हवाला दिया है. अब इस्लाम के नाम पर हो रही मार काट को देखते हुए क्या एक और मुहम्मद की जरूरत मुराद जी को नहीं महसूस होती?

अच्छा होता कि मुराद जी अपने लेख में कुछ संय्म बरतते और कांवरियों से सम्बंधित समस्या को धर्म से न जोड़ते. ऐसे लेख दूसरों के मन को केवल दुःख पहुँचा सकते हैं.