कुछ लोगों के विचार में समाज में हर ग़लत बात के लिए धर्म जिम्मेदार है. कोई भी घटना घटे वह धर्म को बीच में घसीट लाते हैं और धर्म को और जो धर्म को मानते हैं, उन्हें गालियाँ देना शुरू कर देते हैं. मुझे लगता है कि ऐसे लोग जब तक एक दो बार धर्म को गाली न दे लें उनका दिन ठीक से नहीं गुजरता. ऐसे लोग दया के पात्र हैं. वह कुछ अच्छा करना चाहते हैं पर धर्म के चक्कर में कर नहीं पाते. वह कहते हैं हम धर्म को नहीं मानते, पर हर समय धर्म की रट लगाए रहते हैं - धर्म ने सारे समाज को दूषित कर दिया है, समाज में जितना अन्याय हो रहा है उसके लिए धर्म ही जिम्मेदार है, समाज में जितनी कुरीतियाँ हैं वह सब धर्म की देन हैं, इत्यादि. इतना बड़ा अपराधी है धर्म, पर उसे दंड कैसे दें? धर्म कोई व्यक्ति तो है नहीं जिसे अदालत में हाजिर करके सजा दिलाएं और फांसी पर लटका दें. धर्म तो एक सोच है. एक तरीका हो सकता है कि ऐसा कानून बनाया जाए कि धर्म का सोच रखने वाले व्यक्तिओं को फांसी पर लटका दिया जाए. पर यह कानून सिर्फ़ हिन्दुओं के लिए ही बन सकता है. किसी और धर्म के बारे में ऐसा सोचने वाले ख़ुद ही फांसी पर लटका दिए जायेंगे.
आपने बहुत कम देखा होगा किसी को चिल्लाते हुए कि मैं धर्म में विश्वास करता हूँ. लोग मन्दिर में जाते हैं. तीर्थ स्थानों की यात्रा करते हैं. प्रवचन सुनते हैं. कीर्तन करते हैं. पर कोई यह नहीं कहता फिरता की वह धर्म में विश्वास करता हैं. पर धर्म में विश्वास न करने वालों को जब तक चैन नहीं मिलता जब तक वह यह बात सब को बता न दें, और यह साबित करने की कोशिश न कर लें कि धर्म ग़लत है और समाज की सारी समस्याओं के लिए जिम्मेदार है. यह कैसी मानसिकता है? अरे भाई आप धर्म में विश्वास नहीं करते, ठीक है मत करिये. कौन आप से जबरदस्ती कर रहा है? आप की मर्जी है, धर्म को मानो या न मानो. आप मानते हैं तो किसी को फायदा नहीं. आप नहीं मानते तो किसी को नुकसान नहीं. धर्म को मानना या न मानना एक व्यक्तिगत बात है.
आज हिंदू धर्म की किसी मान्यता का हवाला दे कर कोई भी किसी दूसरे को मजबूर नहीं कर सकता (इस्लाम और दूसरे धर्मों की बात में नहीं करता). बल्कि हिंदू धर्म की किसी भी मान्यता का लोग खुलेआम मजाक उड़ा सकते हैं. किसी भी हिंदू देवी-देवता की नंगी तस्वीर बना सकते हैं. अगर कोई शिकायत करता है तो मीडिया और कानून गाली देने वालों का ही समर्थन करता है. इस के बाद भी लोगों का मन नहीं भरता. जब मौका लगता है हिंदू धर्म को गाली देने से बाज नहीं आते.
मुझे ऐसे लोगों पर दया आती है. अरे भाई अपनी जुबान गन्दी कर के आप हिंदू धर्म का क्या नुकसान कर लेंगे. यह तो ऐसा धर्म हे कि एक हिंदू अगर हिंदू धर्म को गाली भी देगा तब भी हिंदू ही रहेगा. इस धर्म में तो आस्तिक भी हिंदू है और नास्तिक भी. आप क्या खाते हैं, क्या पहनते हैं, कैसे रहते हैं, आपकी मर्जी है. आप को हिंदू होने का सर्टिफिकेट नहीं लेना किसी से. कोई आप को हिंदू धर्म से निकाल नहीं सकता. हिंदू धर्म को गाली देने से बेहतर होगा उसे समझना. धर्म के पीछे डंडा लेकर मत दौड़िये. उस से धर्म का कुछ नहीं बिगड़ना. दौड़ते-दौड़ते गिर पड़े तो ख़ुद ही चोट खा जाओगे.
साईं बाबा कहा करते थे कि सब का मालिक एक है. हम सब ईश्वर की संतान हैं. ईश्वर चाहता है कि हम सब एक दूसरे से प्रेम करें. आइये नफरत को अपने दिल से निकाल दें, सब से प्रेम करें और कहें, सब का मालिक एक है.
दैनिक प्रार्थना
हमारे मन में सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति, मित्रता और शांतिपूर्वक साथ रहने का भाव हो.
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Sunday, June 01, 2008
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